शहडोल- 1947 देश की आजादी के बाद भुखमरी गरीबी से देश जुझता रहा वही कई देशभक्त नेता भी आए और देश की समृद्धि में अपना महान सहयोग प्रदान किया तो दूसरी ओर देश की जनता ने भी नेताओं का सहयोग किया धीरे-धीरे समय बदलता गया देशभक्ति सिर्फ दिखावा बन गई देशभक्त नेता मिलना मुश्किल हो गया अब ऐसे नेता कुर्सी पर बैठते हैं जो बैठते ही अपने कमीशन की बात पहले ही करना शुरु कर देते हैं इन नेताओं को न तो देश कोई मतलब ना प्रदेश से कोई मतलब ना जिले सेना नगर से ना गांव से मतलब न गांव में रहने वाले उन आम नागरिकों महिला पुरुष बच्चे व उससे कोई मतलब नही है मतलब है तो सिर्फ रुपया से क्या इसी दिन के लिए हमारे पूर्वजों ने देश के लिए भारत माता के लिए अपना सर्वस्व निछावर किया था |
“100 रुपया का सफेद कुर्ता कर रहा कमाल”
आज की राजनीति और राजनेताओं के बारे में क्या कहें , अब जहां पहले एक लीडर हुआ करता था आज का ऐसा फैशन या यू कहें कि एक ऐसा दौर चला है कि हर घर में 100रु का सफेद कुर्ता वाले नेता जी मिल जाएंगे अगर इनकी योगिता की बात की जाए तो ऐसे नेताओं की योग्यता के क्या कहने जहां ना हो विवाद वहां करवाते हैं यह 100 रुपया कुर्ता वाले नेता जी विवाद आपने देखा होगा कोई भी मामला हो कैसा भी मामला हो वहां अगल बगल में कोई ना कोई कुर्ता धरी नेता जी जरुर मिलेंगे ऐसा भी नहीं कि इन नेताजी की पकड़ प्रदेश के मुखिया से ना हो अब आप अंदाजा लगाइए कि आज भारत देश कितना आगे निकल गया कि एक छोटे से गांव में रहने वाले सफेद 100 रुपया का कुर्ता पहनने वाले नेता जी की जेब में प्रदेश के मुखिया रहता है जब चाहे जब प्रदेश के मुख्यमंत्री से डायरेक्ट बात होती है लेकिन ऐसे कई लाचार दर-दर भटक ने वाले ग्रामीण हैं जिनसे प्रदेश के मुखिया क्या क्षेत्र के विधायक और सांसद जी मिल जाएं तो बहुत बड़ी भाग्य की बात है और सबसे दुखद चीज तो यह है कि अगर समस्या का समाधान हो जये गरीब नगर वासी ग्रामवासी बेचारे उस100 रुपए के कुर्ता पहनने वाले नेता जी पर ही आश्रित होते हैं |क्योंकि इन 100 रुपए के कुर्ता पहनने वाले नेता जी के जेब मे प्रदेश के मुखिया रहते |
भाजपा और कांग्रेस की लड़ाई आ रहा लोकसभा चुनाव
विधानसभा चुनाव का दौर अभी समाप्त हुआ जिसके परिणाम भी अच्छी आए कहीं भाजपा ने बाजी मारी तो कहीं कांग्रेस ने बाजी मारी पटाखे फूट मिठाइयां बटी और अब जनता अपने प्रत्याशी से समस्या बताना शुरू ही किया कि प्रत्याशियों द्वारा यह कहा गया कि लोकसभा चुनाव तक अभी इंतजार करना पड़ेगा वही कुछ 100 रुपए वाले कुर्ता वाले नेता जी की तो मानो अब चांदी ही चांदी है जिनका प्रत्याशी जीता जिनकी सरकार बनी अब उनके क्या कहने अब तो यह नेता जी कहते हैं कोई भी काम हो हमें बताओ डारेक्ट प्रदेश मुखिया से करवा देंगे |
बदले की राजनीति में पिस रहे अधिकारी-
देश में सरकार बनते ही सबसे पहले शुरु हुई बदले की राजनीति पढ़े-लिखे IAS-IPS अधिकारी पर लगा दाव किस किस अधिकारी ने दिया भाजपा को सपोट किसने किया कांग्रेस का विरोध शुरु हुई बदले की राजनीति प्रदेश में कई आला अधिकारियों के ट्रांसफर चुटकी बजाते ही नेता जी ने कर दिया क्या यह सही है नेताजी को अब लोकसभा चुनाव को हर हाल में निकालना है अब ऐसे में बेचारे IAS-IPS अधिकारी करे भी तो क्या जिन IAS-IPS अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए क्या वह सही है क्या गरीब जनता की सुनने वाला कोई है या नहीं किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर चंद मिनटों में ही हो जाता है और जीन अधिकारियों के ऊपर नेताजी लोगों का हाथ रहता है बेचारे कुर्सी पर बैठे रहते फिर चाहे नेताजी के हज़ारोअवैध कार्चय लते रहें अभी हाल ही में शहडोल जिले के पुलिस अधीक्षक महोदय का ट्रांसफर हो गया पर ऐसा क्या हुआ कि मंत्रालय से 24 घंटे के अंदर ही ट्रांसफर रुक गया वहीं दूसरी तरफ शहडोल जिले की कलेक्टर महोदया का ट्रांसफर हो गया अब देखना यह है कि क्या कलेक्टर महोदया का ट्रांसफर रुकता है या नहीं पर ऐसा लगता है कि कलेक्टर महोदया का ट्रांसफर नहीं रुक सकता क्योंकि आज के परिवेश में जिला अधिकारियों के साथ जब तक कोई सफेद पोश नेता नहीं खड़ा होता उस की कुर्सी पर खतरा मंडराता रहता है दिन रात मेहनत कर IAS-IPS की परीक्षा पास कर आए अधिकारी एक कठपुतली बनकर रह जाते हैं वही जनता की समस्याओं का समाधान सिर्फ और सिर्फ नेताजी ही करते है लेकिन समस्या का समाधान सिर्फ उन्ही लोगों का होता है जो नेताजी की चापलुसी भर पेट करते आज की राजनीति कैसी है और जब देश आजाद हुआ था उस समय की राजनीति कैसी थी और आज की राजनीति की परिभाषा इन 100 रुपए का कुर्ता पहन वाले नेता जी लोगों ने 2019 में राजनीति की परिभाषा ही बदल डाली | पहले नेताजी राष्ट्र प्रेम राष्ट्रहित एवं अपने क्षेत्र की जनता की समस्या सुनते उसका समाधान करते थे लेकिन आज के 100 रुपया का कुर्ता पहनने वाले नेता जी क्षेत्र की जनता की समस्या सुनकर आला अधिकारियों को अपने कुर्ते तथ जेब मे प्रदेश के मुखिया को रखने का दम खम दिखाकर अपना अवैध काम भी उनIAS-IPS अधिकारियों से कर लेते हैं विडंबना यह है कि आला अधिकारी भी इमानदारी से अपना कार्य नहीं कर पाते और जो इमानदारी दिखाना चालू करता है अधिकारी इमानदारी से गरीब जनता नगर वासी ग्राम वासियों की समस्या का समाधान तत्काल करना शुरू करता है उस अधिकारी का ट्रांसफर होना निश्चित ही शहडोल जिले की राजनीति इसी रुपरेखा में चलती है जहां चंद मुट्ठी भर 100रु का कुर्ता पहन ने वाले नेता जी के आगे ias ips अधिकारी भी कठपुतली बनकर नाचना चालू कर देते हैं और जनता बदलाव बदला बदला करती रह जाती है फिर चाहे भाजपा हो या कांग्रेस, समाजवादी हो या बहुजन पर जनता का क्या लाभ है |वही कागजो मे लाखों-करोड़ों का झोल- झाल पर सिर्फ जांच जांच जांच और सिर्फ जांच चलती रहती है जैसे ही सत्ता पर नई सरकार बनती है| जांच रुक जाती है अगर आज के नेताओं में दम हैै तो जो भ्रष्टाचार की लहर नेताजी नेतााजी के केबिन सेेे चा छोटे-मोटे अधिकारी कर्मचारियों तक पहुंच कर खत्म होती हैै क्या उसे बंद करवा सकते हैं नहीं नहीं नहीं |