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इंदौर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को मन की बात में स्वच्छता के जज्बे के लिए इंदौर के नागरिकों की सराहना की। उन्होंने इंदौर के स्वच्छता सर्वेक्षण सूची में लगातार चार बार शीर्ष पर रहने का उल्लेख भी किया। इसके लिए यहां के लोगों ने प्रशासन को पूरा सहयोग दिया। यह समग्र प्रयासों का सफर 2015 से शुरू हुआ जो अभी भी जारी है। स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष पर रहने के लिए इंदौर के लोगों और प्रशासन ने इस तरह काम किया-
– 2015 में शहर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में घर-घर कचरा कलेक्शन की शुरुआत हुई। दिसंबर-2016 तक शहर के 100 प्रतिशत घरों से सीधा कचरा लिया जाने लगा। इसी दौरान 1380 जगह कचरे के बड़े डिब्बे हटा दिए गए।
– 2016 में ही इंदौर में वैज्ञानिक तरीके से रोज 1000 टन गीले और सूखे कचरे का निपटान होने लगा। अमानक पालिथीन पर प्रतिबंध लगाने के साथ कचरा फैलाने वालों के खिलाफ स्पाट फाइन की कार्रवाई शुरू की गई।
– इसके बाद शहर की सड़कों और स्मारकों की सफाई के लिए मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीन किराए पर ली जाने लगी।
– 2017 में एक और कदम आगे बढ़ते हुए इंदौर के लोगों ने घरों-दुकानों से गीला-सूखा कचरा अलग-अलग कर देने की आदत डाली।
– 2018 में ज्यादा कचरा पैदा करने वाले 274 बल्क जनरेटर और बगीचों में गीले कचरे से खाद बनाने के संयंत्र व पिट बनाई गई। मलबा और विध्वंस सामग्री के निपटान के लिए शहर के ट्रेंचिंग ग्राउंड में प्लांट तैयार हुआ, जहां वेस्ट मटेरियल से पेवर ब्लाक और ईंट बननी शुरू हुईं।
– 2019 में ट्रेंचिंग ग्राउंड में बायो रेमिडिएशन प्रक्रिया के तहत 15 लाख टन पुराने कचरे का निपटान किया गया। इससे करीब 100 एकड़ जमीन खाली हुई। ऐसा करने वाला इंदौर पहला शहर था।
– 2020 में इंदौर में 100 प्रतिशत कचरे के एकत्रीकरण, गीले कचरे से सीएनजी का उत्पादन और उससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट के वाहनों का संचालन, 12 तरह के सूखे कचरे को अलग-अलग करना, दूषित पानी के पुनर्उपयोग, पब्लिक और कम्युनिटी टायलेट की मजबूत व्यवस्थाओं समेत अन्य कई प्रयोग सफलतापूर्वक किए, जिससे इंदौर लगातार चौथी बार सबसे साफ-सुथरा शहर घोषित हुआ।
– 2017 में 434 शहरों में स्वच्छता सर्वे हुआ था, 2018 में यह संख्या बढ़कर 4203, 2019 में 4237 और 2020 में 4242 हो गई। 2021 के सर्वे के परिणाम सितंबर में आने हैं। इसमें भी इंदौर के लगातार पांचवीं बार नंबर एक पर आने की पूरी उम्मीद है।
वाटर प्लस से और पुख्ता हुई दावेदारी
शहर को वाटर प्लस सर्टिफिकेशन मिलने के बाद स्वच्छता में पांचवीं बार नंबर एक पर आने की दावेदारी और पुख्ता हुई है। इसके अलावा सेवन स्टार रेटिंग मिलने की भी पूरी संभावना है, जिसके लिए शहर बीते दो साल से लगातार कोशिश कर रहा है। सेवन स्टार रेटिंग पाने के लिए किसी भी शहर का वाट प्लस होना जरूरी है। पिछले दो साल से इंदौर को फाइव स्टार रेटिंग से ही संतोष करना पड़ रहा है।

